March 2, 2026

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वैदेही हॉस्पिटल रायपुर के सत्येंद्र द्विवेदी पर मरीज दलाली व पारिश्रमिक नहीं देने का लगा गंभीर आरोप,
कोरबा जिलाधीश से की गई शिकायत।

प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज छत्तीसगढ़/कोरबा – जन सेवा करने के नाम पर बड़े बड़े हॉस्पिटल संचालन करने वाले कोई न कोई अस्पताल अथवा प्रबंधन पर आए दिन कई गंभीर आरोप लगते रहते हैं। अपनी व्यवसाय चमकाने के लिए अस्पताल प्रबंधन कई ऐसे काम कर जाते हैं जिससे उनकी सोच और कार्यशैली पर प्रश्न उठाए जाते रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के कोरबा से एक मामला प्रकाश में आया है। कोरबा हाउसिंग बोर्ड रामपुर निवासी सत्येंद्र द्विवेदी नामक व्यक्ति ने दो बेरोजगार युवकों को अपने अधीन काम करते हुए वैदेही हॉस्पिटल रायपुर (भाटागांव चौक) का प्रचार प्रसार करने व प्रतिमाह प्रति व्यक्ति बीस हजार रुपए देने की बात कही गई। बेरोजगार युवकों ने सत्येंद्र द्विवेदी के निर्देश पर अस्पताल का प्रचार प्रसार शुरू कर दिया। अपने क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों, मितानिनों, अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से सत्येंद्र द्विवेदी की जान पहचान कराना शुरू कर दिया। लगभग 2 माह पश्चात युवकों को समझ आया कि उनसे मरीज दलाली का कार्य कराया जा रहा है। बेरोजगार युवकों ने इस प्रकार का कार्य करने को मना करते हुए कहा कि हमारी पारिश्रमिक दीजिए तो वैदेही हॉस्पिटल भाटागांव चौक रायपुर में मार्केटिंग का कार्य करने वाले सत्येंद्र द्विवेदी ने युवकों को पारिश्रमिक देने से मना कर दिया गया और कहा गया कि तुम्हें जो करना है कर लो।
युवकों ने कोरबा जिलाधीश से शिकायत कर सत्येंद्र द्विवेदी पर मरीज दलाली करने के गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत किया है और अपनी पारिश्रमिक दिलाए जाने की मांग भी किया गया है।इस आरोप पर पक्ष जानने के लिए सत्येन्द्र द्विवेदी से वार्ता करने पर उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर जो आरोप लगाए गए हैं वह निराधार है।वैदेही अस्पताल रायपुर के डॉ विपिन बंसल से इस संबंध में वार्ता करने पर उन्होंने कहा कि सत्येंद्र द्विवेदी हमारे हॉस्पिटल में काम नहीं करता है वह डेढ़ माह पूर्व हॉस्पिटल के मार्केटिंग के लिए आया था,और मार्केटिंग का कार्य करता था,उससे हमारा कोई लेना देना नहीं है।
बताते चलें कि जनसेवा करने के नाम पर अस्पताल संचालन करने वाले बड़े बड़े अस्पतालों के नित नए-नए कारनामें देखने सुनने में आता है। अस्पताल व्यवसाय का एक प्रमुख केंद्र बन गया है। जब से केन्द्र/राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत की है तब से कई ऐसे भी अस्पतालें हैं जो आयुष्मान कार्ड पर इलाज करने के नाम पर सामान्य बीमारी को भी गंभीर दर्शाकर सरकार को चूना लगाया जा रहा है।
कई अस्पताल प्रबंधन के द्वारा किसी भी बीमारी के आयुष्मान कार्ड में निःशुल्क करने की बात कही जाती है। पर मरीज दलाली करने वाले जैसे ही कोई मरीज हॉस्पिटल लेकर जाते हैं उन्हें दस हजार तक की मोटी रकम बतौर कमीशन दी जाती है। यह वाकई शर्मसार करने वाली बात है। इस पर स्वास्थ्य मंत्रालय को संज्ञान लेने की आवश्यकता है।