August 1, 2026

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भाकपा ने नकटी के उजाड़े गए ग्रामीणों के लिए मुख्यमंत्री को भेजा पत्र। माफी, मुआवजा और पुनर्वास की मांग, अन्यथा जन-आंदोलन की चेतावनी

प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज़ छत्तीसगढ़ कोरबा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, छत्तीसगढ़ राज्य परिषद सदस्य एवं जिला सचिव कॉमरेड पवन कुमार वर्मा ने आज जिलाधीश कोरबा के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा। पत्र में रायपुर जिले के ग्राम नकटी में भाजपा सरकार द्वारा गरीबों के घर तोड़े जाने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ितों के लिए माफी, मुआवजा एवं सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की गई है।

भाकपा ने बताया कि दिनांक 29 जून 2026 को राज्य सरकार के प्रशासन द्वारा नकटी गांव में आधी रात को बुलडोजर चलाकर लगभग 85 गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए। यह कार्रवाई मानसून के मौसम में, बिना पूर्व सूचना और बिना मानवीय दृष्टिकोण के की गई, जो स्वयं सरकार के विस्थापन नियमों का घोर उल्लंघन है।

इस अमानवीय घटना के बाद दिनांक 2 जुलाई 2026 को भाकपा, जिला रायपुर का एक प्रतिनिधि मंडल कामरेड सुखदास बंजारे के नेतृत्व में नकटी पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल में कामरेड बरनावा, कामरेड निसार अली, कामरेड गोस्वामी, कामरेड वाल्दे एवं कामरेड सोनकर शामिल थे। दल ने उजाड़े गए पीड़ित ग्रामीणों एवं किसानों से भेंट कर उनका दुःख-दर्द साझा किया।

पत्र में रखी गई प्रमुख मांगें:

  1. तत्काल मुआवजा: उजाड़े गए सभी 85 परिवारों को अविलंब पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।
  2. सार्वजनिक माफी: इस बर्बर कार्रवाई के लिए राज्य सरकार पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
  3. सम्मानजनक पुनर्वास: सभी विस्थापित परिवारों को ग्राम नकटी में ही नए आवास बनाकर दिए जाएं। जब नया रायपुर में पर्याप्त सरकारी भूमि है, तो गरीबों को उजाड़ना सरकार की गरीब-विरोधी मानसिकता दर्शाता है।
  4. शिक्षा की व्यवस्था: पीड़ित परिवारों के स्कूली बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए स्कूल आने-जाने की तत्काल व्यवस्था की जाए।
  5. भोजन एवं स्वास्थ्य: सभी विस्थापित परिवारों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल एवं आवश्यक दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  6. दोषियों पर कार्रवाई: इस अमानवीय कृत्य के जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

जिला सचिव पवन कुमार वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने गरीबों के साथ न्याय नहीं किया और मांगों पर शीघ्र कार्यवाही नहीं हुई, तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी प्रदेशव्यापी जन-आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।