
प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज़। आज का दिन किसी भी अस्पताल का भावनात्मक दृष्टिकोण के नज़रिए से इलाज नहीं होता बल्कि आज का दिन सभी चिकित्सक अपने समय नौकरी बजाने में माहिर होते हैं चाहे वो सरकारी अस्पताल हो या निजी अस्पताल हो। लेकिन छत्तीसगढ़ के कोरबा जिला के अंतर्गत आने वाले गांव लेमरू जो कि अपने आप में जंगली इलाका के नाम से जाना जाता है। ग्राम पंचायत लेमरू में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ मुख्य (आर.एम.ए.) चिकित्सक आर.एम.गौतम ने बताया कि लेमरू के चारों तरफ 40 किलोमीटर के गांवों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में ही इलाज किया जाता है। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य चिकित्सक लेमरू गौतम का कहना कि हम किसी भी त्यौहार में चाहे वो रक्षा बंधन, होली, तीजा या चाहे हरेली त्यौहार क्यों न हो हम यहां ड्यूटी करते हैं क्यों चाहे त्यौहार हो या नहीं भी हो दिन हो या चाहे आधी रात हो, मरीज के लिए हम 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। मरीज के परिवारों का कहना है कि जब भी कोई परेशानी होती है तो हमारे लिए सब सुविधा उपलब्ध कराते हैं।
यह सोचने वाली बात है कि आज कल भावनाओं को देखकर कोई अस्पताल नहीं चलता किंतु लेमरू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसा है जो गांव के लोगों के भावनाओं को देखते हुए उनका इलाज होता है जो अपने आप में छत्तीसगढ़ में कोरबा जिला से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू एक मिसाल के रूप में प्रतीत हो रहा है।

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