प्रखर राष्ट्रवाद न्यूज। कोरबा जिला के रजगामार क्षेत्र में आय दिन बिजली गुल होती रहती है। दिन भर बिजली रहती है मगर जहां रात हुई और हल्की बारिश दिखी फिर लाइनमेनों की कटौती शुरू हो जाती है। रजगामार सबस्टेशन में बैठे कर्मचारी को पूछने पर फॉल्ट का हवाला दे दिया जाता है। कर्मचारियों के पास एक ही उत्तर होता है फॉल्ट है जबकि सबस्टेशन एरिया को अंधेरे से दूर रखा जाता है। आस पास के ग्रामीणों को पूछने पर पता चलता है कि यहां तो कभी कभार रात में बिजली रहती है। बताते हैं एक हफ्ते में 2-3 दिन ही बिजली रहती है। और कहते हैं कि अब तो आदत हो गई है। जबकि यहीं से जंगली इलाका शुरू होता है। हाथी प्रभावित क्षेत्र के साथ साथ अजगरों का भी डेरा रहता है। बिजली की ये हालत देखकर रहवासी कहते हैं कि मौत और बिजली का कोई भरोसा नहीं, किसी भी बिजली कर्मचारियों को कोई मतलब नहीं है। सोचने वाली बात है छत्तीसगढ़ में कोरबा जिला को ऊर्जा धानी कहते हैं मगर कोरबा जिले के कई ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां आज तक बिजली पहुंची ही नहीं। शहर के नजदीकी गांवों की ये दशा है तब तो जिले के दूरस्थ अंचलों में क्या हालात होगी। मगर विभाग को कभी जांच की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ी। उसे तो केवल अपने बिल (पैसे) से मतलब है बाकि जाएं चूल्हे में। आखिर ऊर्जाधानी कब पूर्ण होगी। या फिर यूं ही मिया मिट्ठू रहेगा।

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